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   भौगोलिक स्थितिः 
   
यह जिला उत्तरी अंक्षांश 23º.46’ से 26º.20’ तथा पूर्वी देशान्तर 73º  से 74º.35’ के मध्य स्थित है | उत्तर में राजसमंद, दक्षिण में डूंगरपुर तथा बांसवाड़ा, पूर्व में चित्तौड़गढ़ तथा उत्तर-पश्चिम में पाली व पश्चिम में सिरोही जिलों की सीमाओं से घिरा हैं |
                      
                                  Udaipur lake 

   जलवायुः जलवायु समशीतोष्ण है | मौसमी परिवर्तनों का दबाब कम ही रहता है | जनवरी वर्ष का सबसे ठंडा व मई एवं जून गर्म माह है | औसत वर्षा 64.50 से.मी. है |
   क्षेत्रफलः 13,419 वर्ग किमी. [नगरीय- 98.52 वर्ग किमी., ग्रामीण- 13,320.48 वर्ग किमी.] | वन क्षेत्रफल- 4,682.20 वर्ग किमी., आरक्षित वन क्षेत्र- 3043 वर्ग किमी., अवर्गीकत वन क्षेत्र- 35.98 वर्ग किमी., अभयारण्य- (1) कुम्भलगढ़ अभयारण्य, उदयपुर, क्षेत्रफल- 278.55 वर्ग किमी. (2) जयसंमद अभयारण्य, उदयपुर, क्षेत्रफल- 55 वर्ग किमी. (3) सज्जनगढ़ अभयारण्य, उदयपुर
प्रमुख नदियां- बनास, बेडच, जाखम, साबरमती, सोम, वाकल, बांध/झीलें- जयसमंद, उदय सागर, फतेह सागर, स्वरुप सागर, पिछोला | 
   जनसंख्या
   सकल-   26,33,312,    ग्रामीण- 21,42,995, ; शहरी-  4,90,317, स्त्री- 12,97,308, पुरुष- 13,36,004, जनसंख्या वृद्धि दर- 27.41, लिगांनुपात- 971 महिलाः 1000 पुरुष, अनुसूचित जाति- 1,58,257, अ. जनजाति- 12,60,432, सघनता- 196 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर, परीवारों की संख्या- 5,10,608, साक्षरता दर- 58.62 प्रतिशत [पुरुष 73.62, स्त्री 43.26 प्रतिशत] |
   उप तहसीलें- 7, गिरदावरी सर्किल- 48, पटवार सर्किल- 407, कुल गांव- 2,351, आबाद गांव- 2,339 गैर आबाद गांव- 12,& ग्राम पंचायत- 498,& विद्युतीकृत ग्राम- 2,015, पुलिस थाने- 37, चौकियां- 45, कारागृह- 4  | 
   कृषि/पशुधन
  
कृषि क्षेत्र [हेक्टेयर में] 14,62,105, अकृषि क्षेत्र-  9,98,015, कृषि योग्य बरानी भूमि- 4,64,090,  कुल पशुधन- 29,65,170, पशु चिकित्सालयों की संख्या- 61 |
परिवहन/संचार
  
जिला सड़कें- 3,753 किमी. | राज्य राजमार्ग संख्या- 9 बी- 36 किमी., 9-38 किमी., 10-124 किमी., राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या- 8 -107 किमी., 76- 142 किमी. | पोस्ट आफिस- 497, टैलीग्राफ आफिस- 22  |

  

  सहकारिता/उद्योग
   सहकारी समितियां- 784, सदस्यों की संख्या- 3,51,476, दुग्ध सहकारी समितियां- 529, सदस्यों की संख्या- 30,384, दुग्ध संग्रहण- 245 टन प्रतिदिन |
फैक्ट्रियों की संख्या- 300, पंजीकृत लघु उद्योग- 16,527, औद्योगिक क्षेत्रों की संख्या - 8 |
   स्वास्थ्य/शिक्षा
   एलोपैथिक अस्पताल- 10, आयुर्वेद औषधालय एवं यूनानी अस्पताल- 191, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र - 18, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र- 91, स्वास्थ्य उपकेन्द्र- 532, 
महाविद्यालय- 30, प्राथमिक विद्यालय- 2,891, उच्च प्राथमिक विद्यालय- 671, उच्च माध्यमिक विद्यालय- 109, माध्यमिक विद्यालय- 183  |
   ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
   उदयपुर की स्थापना 1567 ई. में सिसोदिया वंश के शासक महाराजा उदयसिंह ने की थी | मेवाड़ की राजधानी उदयपुर थी | मेवाड़ के शासक राणा प्रताप सिंह एकमात्र राजपूत शासक थे , जिन्होने अकबर की अधीनता को किसी भी रुप में स्वीकार नहीं किया और जीवन भर मुगलों से संघर्ष करते रहे | उदयपुर में राजपूत स्थापत्यकला के अवशेष उसके ऐतिहासिक महत्त्व की पुष्टि करते हैं | उदयपुर साम्भर नदी के उत्तर-पूर्व में अरावली पर्वत श्रेणीयों में स्थित है | हरी-भरी पहाड़ियो के बीच ; हिलोरे लेती सुरम्य झीलों ने इसे 'झीलों का नगर' बना दिया है | यह नगर 'राजस्थान का कश्मीर', 'बेनिस आव दी ईस्ट' नामों से भी विख्यात है | 
   पर्यटन स्थल
   राजमहल- यह राज्य का सबसे विशाल महल है | शहर के सबसे ऊंचे स्थल पर बना यह महल 450 मीटर लम्बा, 180 मीटर से 240 मीटर चौड़ा है | महाराणा उदयसिंह द्वारा बनाया गया है | राजमहलों के बाड़ी महल, दिलखुश महल, यश मंदिर, मोती महल, भीम विलास, मोर चौक, छोटी चित्रसाल, स्वरुप विलास, प्रीतम निवास दर्शनीय हैं | महल का एक हिस्सा महाराणा के निजी उपयोग के लिए है | शेष भाग महाराणा मेवाड़ चेरिटेबल ट्रस्ट के अंतर्गत है | महल के एक हिस्से में प्रताप संग्रहालय है, जहां पुरानी तस्वीरें, शिलालेख, हथियार, विभिन्न प्रकार की पगड़ियों का संग्रह है |
   पिछोला झील- यह उदयपुर की सबसे प्रसिद्ध झील है | इसके बीच में जग मंदिर और जग निवास महल है, जिसका प्रतिबिम्ब झील में पड़ता है | इसका निर्माण 14वीं शताब्दी के अंत में राणा लाखा के शासनकाल में एक बंजारे ने कराया था | बाद में राजा उदयसिंह ने इसका जीर्णोद्धार कराया | बादशाह बनने से पहले शाहजहां भी इस झील के महलों में आकर ठहरा था |
   जग महल- पिछोला झील के दक्षिणी छोर के एक टापू पर स्थित इस महल का ऐतिहासिक महत्त्व है | शाहजहां को तत्कालीन महाराजा जयसिंह ने यहीं शरण दी थी | यहां के गोल गुम्बद, पानी के हौज और उद्यानों ने ही बाद में शाहजहां को 'ताजमहल' के भावी स्वरुप की प्रेरणा दी थी | 
   जग निवास- पिछोला झील के बीचोंबीच स्थित इस महल को महाराणा जगतसिंह नें 17वीं शताब्दी में बनवाया था | वर्तमान में यह अंतराष्ट्रीय स्तर के आधुनिक सुविधाओं से युक्त होटल में परिवर्तित कर दिया गया है | जग निवास [लोक पैलेस] में खास महल, बड़ा महल, दिलाराम, सज्जन निवास और चंद्रप्रकाश विशेष रुप से दर्शनीय हैं | 
   श्री नाथद्वारा- उदयपुर के उत्तर में 48 किमी. दूर वैष्णवों का सुप्रसिद्ध मंदिर है, जो श्रीनाथजी का तीर्थ स्थान है | श्रीनाथजी की मूर्ति 12वीं शताब्दी की बताई जाती है |  
   हल्दी घाटी- नाथद्वारा करीब 11 किमी. पश्चिम में मेवाड़ की इतिहास प्रसिद्ध रणस्थली हल्दी घाटी है | उल्लेखनीय है कि 1576 ई. में अकबर एवं मेवाड़ के राणा प्रताप के बीच यहीं वह ऐतिहासिक युद्ध हुआ था, जिसमें मुगल सेना को थोड़े राजपूत सैनिकों ने नाकों चने चबवा दिए थे | राणा प्रताप ने अंततः हार नहीं मानी और 1590 तक उनके उत्तराधिकारीयों ने भी मुगलों से संघर्ष जारी रखा | 
   सहेलियों की बाड़ी- फतहसागर पाल की तलहटी में बनी सहेलियों की बाड़ी राजस्थान के रमणीक बगीचों में से एक है | सहेलियों की बाड़ी के बीच में गोल तथा चौकोर फव्वारे लगे हैं |
   सज्जन निवास बाग- इस बाग का निर्माण महाराणा सज्जन सिंह ने करवाया था | यहां के गुलाब अपने आकार के लिए विख्यात है | इस कारण इसे गुलाब बाग भी कहा जाता है | इसी में नगर परिषद् के द्वारा बच्चों की रेलगाड़ी चलाई जाती है | इस भवन को वाणी-विलास के नाम से भी पुकारा जाता है |
   जगत मंदिर- यह उदयपुर से 56 किमी. दूर कुरावड़ के पास जगत नामक गांव में स्थित है | यहां अम्बिका देवी का भव्य मंदिर है, जिसकी स्थापना 10वीं शताब्दी में हुई थी | कला एवं शिल्प की दृष्टि से यह अत्यन्त आकर्षक हैं |
   फतह सागर- नगर के उत्तर-पश्चिम में करीब 5 किमी. दूर यह झील सर्वप्रथम सन् 1678 में महाराणा जयसिंह द्वारा बनवाई गई थी, परन्तु एक बार हुई अतिवृष्टि ने इसे तहस-नहस कर दिया | इसके पुननिर्माण का श्रेय महाराणा फतहसिंह को है, जिन्होनें 6 लाख रुपये की लागत से इसके लिए मजबूत बांध का निर्माण करवाया | उन्हीं के नाम पर झील को फतहसागर कहा जाने लगा | यह झील तीन वर्ग किलोमीटर में फैली-पसरी है |
   खनिज सम्पदा
   उदयपुर जिला खनिजों का अनुपम भण्डार है | यहां महत्त्वपूर्ण खनिजों की विभिन्न किस्में पाई जाती है | जिले में प्राप्त होने वाले धातु तथा अधातु खनिजों में तांबा, लेड, जस्ता, चांदी प्रमुख है | इनके अलावा मैंगनीज, लोहा, चट्टानी फास्फेट, ऐस्बेशस्टास, कैल्साइट, लाइमस्टोन, डोलोमाइट तथा संगमरमर प्रमुख है |
  
 

          

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