|
शाम को शिव दल मेवाड़ के
बैनर तले कार्यकर्ताओं ने
कैंडल मार्च किया। उदयपुर
अगेंस्ट करप्शन के बैनर थामकर लोगों से इस
आंदोलन में जुड़ने की अपील
की गई। मेडिकल छात्रों ने
बताया कि जब लोकपाल बिल के माध्यम से
हम पारदर्शिता लाना चाहते
हैं, तो सरकार इसमें पीछे क्यों हट रही है।
अन्ना का आंदोलन जन आंदोलन
बन गया है। जनलोकपाल बिल के
लिए हम भले ही रामलीला
मैदान तक नहीं जाएं, लेकिन
स्थानीय तौर पर इस आंदोलन
को जीवित रखेंगे। उदयपुर
अगेंस्ट करप्शन के तहत होने वाले
आंदोलन में हम पूर्णरूप से
समर्थन देंगे। यह आंदोलन
अन्ना का नहीं हर आम का आंदोलन है।
अन्ना के समर्थन में निकली
यह रैली जिस चौराहे से
गुजरी वहां से गुजरने वाले
लोग जुड़ते चले गए। मेडिकल छात्रों के
हाथों से समर्थन में लिखे
नारे की तख्तियां भी थाम
ली। मेडिकल छात्राओं ने कैंडल
मार्च के दौरान मोमबत्तियों के माध्यम से
शहरवासियों को जोड़ने का प्रयास किया। इस दौरान सभी
छात्र छात्राओं ने मेडिकल ड्रेस पहनी हुई थी तथा सबसे
आगे उदयपुर अगेंस्ट करप्शन का बैनर थाम रखा था।
अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद की ओर से कलेक्ट्री
के बाहर सांसद सद्बुद्धि यज्ञ किया गया। पंडित कैलाश नागदा के
नेतृत्व में हुए यज्ञ में प्रदेश मंत्री प्रवीण
खंडेलवाल, विधानसभाध्यक्ष शांतिलाल
चपलोत, किशनलाल शर्मा, शंभुसिंह राठौड़,
शांतिलाल पामेचा आदि उपस्थित थे।
उदयपुर ईंट भट्टा एसोसिएशन की ओर से
कलेक्ट्री के बाहर प्रदर्शन के बाद
राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया गया। ज्ञापन
देने वालों में संरक्षक बंशीलाल कुम्हार,
मांगीलाल ओड़, अध्यक्ष विष्णु प्रजापति, अशोक
प्रजापति आदि शामिल थे। रोटरी क्लब कॉरपोरेट की ओर
से गोवर्धन विलास स्थित स्वर्ण जयंती
पार्क से मशाल जुलूस निकाला गया।
मशाल जुलूस में क्षेत्र के नागरिकों सहित क्लब
अध्यक्ष प्रसून भारद्वाज, वर्ष पुरोहित, सौरभ
जैन आदि शामिल थे। भारत स्वाभिमान न्यास की
स्थानीय इकाई की ओर से सोमवार दोपहर
शहीद स्मारक से कलेक्ट्री तक रैली निकाली जाएगी तथा
कलेक्टर को ज्ञापन दिया जाएगा।
Source: Bhaskar News
90 हजार तृतीय श्रेणी शिक्षक हैडमास्टर भर्ती दायरे से बाहर
जयपुर, May 5, 2011: शिक्षा विभाग में प्रधानाध्यापक
एवं इसके समकक्ष 2093 पदों के लिए होने वाली भर्ती से
राज्य के 90 हजार तृतीय श्रेणी शिक्षक सीधे तौर पर
बाहर हो गए हैं। हायर सैकंडरी, हाई स्कूल में पढ़ाने तथा मिडिल स्कूल में प्रशासनिक काम के
अनुभव की शर्तो ने उनकी योग्यता को दरकिनार कर दिया।
प्रधानाध्यापक भर्ती में शामिल होने से वंचित रहने
वाले ये शिक्षक वे सभी शैक्षणिक योग्यताएं रखते हैं, जो सैकंडरी स्तर के
स्कूलों में पढ़ा रहे उनके ही समकक्ष तृतीय श्रेणी के शिक्षक रखते
हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग में इन पदों की भर्ती राजस्थान लोक सेवा आयोग के
माध्यम से की जा रही है। आयोग ने इसके लिए ऑनलाइन आवेदन
प्रक्रिया शुरू भी कर दी है। विभाग के नियम-कायदों से पीड़ित वे
शिक्षक हैं, जो बीएड सहित अन्य योग्यताएं पूरी करने
के बावजूद महज इसलिए भर्ती से वंचित हो गए कि वे प्राथमिक
स्कूलों में सेवारत हैं। इनमें कई शिक्षक उच्च प्राथमिक स्कूलों में भी हैं।
राज्यभर में शिक्षा विभाग की ओर से तैयार की गई
शर्तो पर विरोध शुरू हो गया है। शिक्षकों ने
राजस्थान प्रारंभिक शिक्षक संघर्ष समिति गठित
कर मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कर उन्हें न्याय दिलाने का अनुरोध
किया है। समिति के संयोजक श्रवण सिंह का कहना
है कि यह उच्च पद पर जाने की ख्वाहिश पाले बैठे
शिक्षकों के साथ अन्याय है। राजस्थान शिक्षक संघ (राधाकृष्णन) के
प्रदेशाध्यक्ष विजय सोनी का कहना है कि जब माध्यमिक
सेटअप में शिक्षकों, विषयाध्यापकों की कमी से उन्हीं शिक्षकों
को प्रतिनियुक्तिपर लगाकर काम कराया जा सकता है तो उन्हें भर्ती
के योग्य नहीं मानना अन्याय है। विभागीय
पदोन्नतियां नहीं होने से ये माध्यमिक कक्षाओं में नियमित रूप से पदोन्नत भी नहीं हो पाए।
भर्ती के लिए ये शर्तें: स्नातक उपाधि साथ में शिक्षा में डिग्री या
डिप्लोमा। हाई स्कूल, जूनियर हायर सैकंडरी, हायर सैकंडरी कक्षाओं में 5 साल
का अनुभव या मिडिल स्कूल में चार वर्ष तक का प्रशासकीय
अनुभव। राजस्थान शिक्षा सेवा नियम के शिड्यूल के
तहत सीनियर टीचर या इससे उच्च पदों पर
पांच साल अध्यापन का अनुभव। देवनागरी लिपि में
हिंदी का व्यावहारिक एवं राजस्थान
की संस्कृति का ज्ञान।
अड़चन यहां: प्राथमिक-उच्च प्राथमिक स्कूलों में
करीब 90 हजार ऐसे शिक्षक हैं जो लंबे समय
से सेवारत हैं। इनमें से बड़ी संख्या में प्रति
नियुक्तियों पर उच्च कक्षाओं में भी अध्यापन
करा रहे हैं या करा चुके हैं। क्रम संख्या 2 की शर्त पूरी
नहीं करने के कारण अब भर्ती से बाहर हुए।
खतरा यह भी: अंदेशा यह भी है कि निजी स्कूलों में
पढ़ा रहे बड़ी संख्या में शिक्षक जुगाड़ कर अध्यापन अनुभव प्रमाण-पत्र
पेश कर भर्ती में शामिल हो सकते हैं, जबकि तृतीय
श्रेणी शिक्षक राजकीय सेवा में होने से ऐसा किसी भी हाल में नहीं कर सकते।
Source: Dainik-Bhaskar |
|
|