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   राज्य सरकार प्रदेश में 40 हजार शिक्षकों की भर्ती करेगी
   भीलवाड़ा, December 19, 2011 : राज्य सरकार शीघ्र ही प्रदेश में 40 हजार शिक्षकों की भर्ती करेगी। इसके बाद काफी हद तक शिक्षकों की कमी दूर हो जाएगी। यह जानकारी प्रारंभिक व माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री नसीम अख्तर इंसाफ ने दी।
कलेक्ट्रेट सभागार में सरकार के तीन साल पर आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने सीएम व चिकित्सा मंत्री से बात कर जिले के अस्पतालों में डाक्टरों के रिक्त पद भरवाने का भरोसा दिलाया। बालिका शिक्षा के प्रोत्साहन को प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने कहा कि जिन सेकंडरी स्कूलों में कंप्यूटर नहीं है, वहां इसकी व्यवस्था करवाएंगे। एक शिक्षक को ट्रेंड किया जाएगा ताकि बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा सुचारु दी जा सके। उन्होंने माना कि अल्पसंख्यकों को स्वरोजगार के लिए लोन दिलाने का लक्ष्य इस साल कम था।  अगले वित्तीय वर्ष में यह बढ़वाया जाएगा। उन्होंने गोपालगढ़ प्रकरण में सीबीआई जांच होने से टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। श्रीमती नसीम ने बताया कि वे पंचायत समिति स्तर पर जाकर जन सुनवाई करेंगी।
  Source: Bhaskar News

  अन्ना के समर्थन में उदयपुर में रैलियां, कैंडल मार्च

  उदयपुर, August 21, 2011. अनशन पर बैठे अन्ना हजारे के समर्थन में आरएनटी मेडिकल कॉलेज के सैकड़ों छात्रों ने प्रमुख चौराहों पर जागरूकता रैली निकाली। इस दौरान हाथों में तख्तियां और मोमबत्ती थामकर हर आम को इस आंदोलन में जुड़ने का आह्वान किया गया। आरएनटी मेडिकल कॉलेज से शुरू हुई रैली देहली गेट, अश्विनी बाजार, हाथीपोल, चेटक सर्कल होते हुए वापस आरएनटी मेडिकल कॉलेज पर संपन्न हुई। इधर, एमबी, बाल और जनाना अस्पताल में सेवाएं दे रहे डॉक्टरों ने भी काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया।

    शाम को शिव दल मेवाड़ के बैनर तले कार्यकर्ताओं ने कैंडल मार्च किया। उदयपुर अगेंस्ट करप्शन के बैनर थामकर लोगों से इस आंदोलन में जुड़ने की अपील की गई। मेडिकल छात्रों ने बताया कि जब लोकपाल बिल के माध्यम से हम पारदर्शिता लाना चाहते हैं, तो सरकार इसमें पीछे क्यों हट रही है। अन्ना का आंदोलन जन आंदोलन बन गया है। जनलोकपाल बिल के लिए हम भले ही रामलीला मैदान तक नहीं जाएं, लेकिन स्थानीय तौर पर इस आंदोलन को जीवित रखेंगे। उदयपुर अगेंस्ट करप्शन के तहत होने वाले आंदोलन में हम पूर्णरूप से समर्थन देंगे। यह आंदोलन अन्ना का नहीं हर आम का आंदोलन है।
   अन्ना के समर्थन में निकली यह रैली जिस चौराहे से गुजरी वहां से गुजरने वाले लोग जुड़ते चले गए। मेडिकल छात्रों के हाथों से समर्थन में लिखे नारे की तख्तियां भी थाम ली। मेडिकल छात्राओं ने कैंडल मार्च के दौरान मोमबत्तियों के माध्यम से शहरवासियों को जोड़ने का प्रयास किया। इस दौरान सभी छात्र छात्राओं ने मेडिकल ड्रेस पहनी हुई थी तथा सबसे आगे उदयपुर अगेंस्ट करप्शन का बैनर थाम रखा था।
अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद की ओर से कलेक्ट्री के बाहर सांसद सद्बुद्धि यज्ञ किया गया। पंडित कैलाश नागदा के नेतृत्व में हुए यज्ञ में प्रदेश मंत्री प्रवीण खंडेलवाल, विधानसभाध्यक्ष शांतिलाल चपलोत, किशनलाल शर्मा, शंभुसिंह राठौड़, शांतिलाल पामेचा आदि उपस्थित थे।
उदयपुर ईंट भट्टा एसोसिएशन की ओर से कलेक्ट्री के बाहर प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया गया। ज्ञापन देने वालों में संरक्षक बंशीलाल कुम्हार, मांगीलाल ओड़, अध्यक्ष विष्णु प्रजापति, अशोक प्रजापति आदि शामिल थे। रोटरी क्लब कॉरपोरेट की ओर से गोवर्धन विलास स्थित स्वर्ण जयंती पार्क से मशाल जुलूस निकाला गया।
मशाल जुलूस में क्षेत्र के नागरिकों सहित क्लब अध्यक्ष प्रसून भारद्वाज, वर्ष पुरोहित, सौरभ जैन आदि शामिल थे। भारत स्वाभिमान न्यास की स्थानीय इकाई की ओर से सोमवार दोपहर शहीद स्मारक से कलेक्ट्री तक रैली निकाली जाएगी तथा कलेक्टर को ज्ञापन दिया जाएगा।   Source: Bhaskar News
   90 हजार तृतीय श्रेणी शिक्षक हैडमास्टर भर्ती दायरे से बाहर
  जयपुर, May 5, 2011:  शिक्षा विभाग में प्रधानाध्यापक एवं इसके समकक्ष 2093 पदों के लिए होने वाली भर्ती से राज्य के 90 हजार तृतीय श्रेणी शिक्षक सीधे तौर पर बाहर हो गए हैं। हायर सैकंडरी, हाई स्कूल में पढ़ाने तथा मिडिल स्कूल में प्रशासनिक काम के अनुभव की शर्तो ने उनकी योग्यता को दरकिनार कर दिया।
प्रधानाध्यापक भर्ती में शामिल होने से वंचित रहने वाले ये शिक्षक वे सभी शैक्षणिक योग्यताएं रखते हैं, जो सैकंडरी स्तर के स्कूलों में पढ़ा रहे उनके ही समकक्ष तृतीय श्रेणी के शिक्षक रखते हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग में इन पदों की भर्ती राजस्थान लोक सेवा आयोग के माध्यम से की जा रही है। आयोग ने इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू भी कर दी है। विभाग के नियम-कायदों से पीड़ित वे शिक्षक हैं, जो बीएड सहित अन्य योग्यताएं पूरी करने के बावजूद महज इसलिए भर्ती से वंचित हो गए कि वे प्राथमिक स्कूलों में सेवारत हैं। इनमें कई शिक्षक उच्च प्राथमिक स्कूलों में भी हैं।
  राज्यभर में शिक्षा विभाग की ओर से तैयार की गई शर्तो पर विरोध शुरू हो गया है। शिक्षकों ने राजस्थान प्रारंभिक शिक्षक संघर्ष समिति गठित कर मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कर उन्हें न्याय दिलाने का अनुरोध किया है। समिति के संयोजक श्रवण सिंह का कहना है कि यह उच्च पद पर जाने की ख्वाहिश पाले बैठे शिक्षकों के साथ अन्याय है। राजस्थान शिक्षक संघ (राधाकृष्णन) के प्रदेशाध्यक्ष विजय सोनी का कहना है कि जब माध्यमिक सेटअप में शिक्षकों, विषयाध्यापकों की कमी से उन्हीं शिक्षकों को प्रतिनियुक्तिपर लगाकर काम कराया जा सकता है तो उन्हें भर्ती के योग्य नहीं मानना अन्याय है। विभागीय पदोन्नतियां नहीं होने से ये माध्यमिक कक्षाओं में नियमित रूप से पदोन्नत भी नहीं हो पाए।
  भर्ती के लिए ये शर्तें: स्नातक उपाधि साथ में शिक्षा में डिग्री या डिप्लोमा। हाई स्कूल, जूनियर हायर सैकंडरी, हायर सैकंडरी कक्षाओं में 5 साल का अनुभव या मिडिल स्कूल में चार वर्ष तक का प्रशासकीय अनुभव। राजस्थान शिक्षा सेवा नियम के शिड्यूल के तहत सीनियर टीचर या इससे उच्च पदों पर पांच साल अध्यापन का अनुभव। देवनागरी लिपि में हिंदी का व्यावहारिक एवं राजस्थान की संस्कृति का ज्ञान।
अड़चन यहां: प्राथमिक-उच्च प्राथमिक स्कूलों में करीब 90 हजार ऐसे शिक्षक हैं जो लंबे समय से सेवारत हैं। इनमें से बड़ी संख्या में प्रति नियुक्तियों पर उच्च कक्षाओं में भी अध्यापन करा रहे हैं या करा चुके हैं। क्रम संख्या 2 की शर्त पूरी नहीं करने के कारण अब भर्ती से बाहर हुए।
खतरा यह भी: अंदेशा यह भी है कि निजी स्कूलों में पढ़ा रहे बड़ी संख्या में शिक्षक जुगाड़ कर अध्यापन अनुभव प्रमाण-पत्र पेश कर भर्ती में शामिल हो सकते हैं, जबकि तृतीय श्रेणी शिक्षक राजकीय सेवा में होने से ऐसा किसी भी हाल में नहीं कर सकते। 
Source: Dainik-Bhaskar

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