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चामुंडा
माता मंदिर हादसा
जोधपुर के मेहरानगढ़ किले में
स्थित चामुंडा देवी मंदिर
में मंगलवार को मची भगदड़
में मरने वालों की संख्या
बढ़कर दो सौ पच्चीस हो गई
है। लगभग 150 लोग घायल हैं
जिन्हें अस्पतालों में
भर्ती कराया गया है. मंदिर के
बाहर दर्दनाक मंजर है.
भगदड़ में अपने परिजनों को
खो चुके लोग बिलख रहे हैं.
नवरात्र का पहला दिन
होने के कारण मंदिर में
काफी भीड़ थी.यह मंदिर
चार सौ फुट की ऊँचाई पर
स्थित है. मंगलवार से
नवरात्र शुरु होने के
कारण इस मंदिर में हज़ारों
भक्तों की भीड़ जमा हुई थी. पड़ा. 400 फुट की
ऊँचाई पर स्थित इस मंदिर
में आने-जाने का रास्ता
काफ़ी तंग है. रास्ता संकरा
होने के कारण हताहत हुए
लोगों को कंधों पर बाहर
निकालना
राजस्थान के गृह
मंत्री गुलाब चंद कटारिया
ने कहा कि नवरात्र को
देखते हुए विशेष इंतज़ाम
किए गए थे लेकिन दीवार
गिरने के कारण भगदड़ मच
गई. राजस्थान की
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे
घटनास्थल पर पहुँच चुकी
हैं. उन्होंने मारे गए
लोगों के परिजनों को दो लाख
और घायलों को पचास हज़ार रुपए
देने की घोषणा की है.
बुधवार को गिने-चुने
श्रद्धालु पहुंचे। इनमें
पूर्व उप राष्ट्रपति
भैरों सिंह शेखावत और
पूर्व विदेश मंत्री
जसवंत सिंह भी शामिल थे।
दोनों ने चामुंडा मंदिर
में पूजा-अर्चना की।
कांग्रेस महासचिव सांसद
राहुल गांधी ने बुधवार को
घटनास्थल का जायजा लिया।
साथ ही मृतक के परिजनों
से मिलकर उन्हें सात्वना
दी और घायलों के शीघ्र
स्वास्थ्य लाभ की कामना की।
राज्य में बुधवार
को दिनभर का शोक घोषित था।
सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुके
रहे। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उनके सभी सहयोगी ने
अपने कार्यक्रम रद रखे।
नवरात्र के दौरान ऐसा कभी
नहीं देखा गया। जोधपुर वाले जिस चामुंडा देवी को अपना
रक्षक मानते हैं, उनके दरबार में बुधवार को
सन्नाटा था।
4 October 2008, हर मृतक
के परिजनो को अब 7.5 लाख
मिलेगे| राजस्थान सरकार की
तरफ से 5 लाख, केयर्न तथा
केन्द सरकार की ओर से एक-एक
लाख रुपए दिए जाने की धोषणा की गई है |
पिछले कुछ वर्षों में
मंदिरों में भगदड़ की घटनाए
अगस्त, 2008 - हिमाचल प्रदेश के
नैना देवी मंदिर में
भूस्खलन की अफ़वाह के
बाद भगदड़ मच गई. इसमें 145
लोगों की मौत हो गई.
नवंबर, 2006 - उड़ीसा के पुरी
में जगन्नाथ मंदिर में चार
लोगों की मौत हो गई
और 18 घायल हो गए.
प्रत्यक्षदर्शियों का
कहना था कि अधिकारियों ने
मंदिर का
दरवाज़ा खोलने में देर कर
दी जिसके कारण भगदड़ मच गई.
जनवरी, 2005 - महाराष्ट्र के
दूरवर्ती मंढारा देवी
मंदिर में भगदड़ मचने से
265 लोग मारे गए. सँकड़ा
रास्ता होने के कारण
हताहतों की संख्या बढ़ गई.
मृतकों में बड़ी संख्या
महिलाओं और बच्चों की थी.
अगस्त, 2003 - नासिक में कुंभ
मेले के दौरान मची भगदड़
में 30 से ज़्यादा
लोगों की मौत हो गई.
1986 - हरिद्वार में एक
धार्मिक आयोजन के दौरान
भगदड़ में 50 लोगों की मौत हो गई.
1954 - इलाहाबाद में कुंभ मेले
के दौरान भगदड़ का भयान
मंजर देखने को मिला.
इसमें लगभग 800 लोगों की
जानें गईं.
इन तमाम घटनाओं में दो
बातें कॉमन हैं- एक तो यह कि
श्रद्धालुओं की मौतें
केवल अव्यवस्थाओं के
कारण हुईं। दूसरी यह कि इन
मौतों के लिए कभी किसी को
जिम्मेदार करार देकर सजा
नहीं दी गई। हर घटना के
बाद तरह-तरह की जांचें
बैठाई गईं, उनकी रपटें भी
प्राप्त हुईं, पर मौतों का
सिलसिला नहीं थमा।
करोड़ों रुपए का
चढ़ावा प्रतिवर्ष भगवान
के नाम पर उन सभी धार्मिक स्थलों
को प्राप्त होता है, जहां
श्रद्धालु बड़ी संख्या में आस्था के साथ मन्नतें
लेकर पहुंचते रहते हैं।
इस तरह की घटनाओं में बच
जाने वाला श्रद्धालु ईश्वर का आभार मानता है। |
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