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Amarnath Cave (अमरनाथ गुफा)
बाबा अमरनाथ हिन्दू धर्म के प्रमुख तीर्थों में से एक है। अमरनाथ गुफा में बर्फ के शिवलिंग के साथ माँ
पार्वती और श्री गणेश का भी बर्फ से प्राकृतिक स्वरुप बनता है।गुफा में बनने वाले
Shiva (शिव) के हिम स्वरुप शिवलिंग
आस्था और विश्वास का प्रमुख कारण है। अमरनाथ गुफा से जुड़ा पौराणिक महत्व भगवान शंकर की
माता पार्वती को अमर कथा का रहस्य सुनाने से जुड़ा है।
बाबा अमरनाथ दर्शन का महत्व पुराणों में भी मिलता है। पुराण अनुसार
काशी में लिंग दर्शन और पूजन से दस गुना, प्रयाग से
सौ गुना और नैमिषारण्य से हजार गुना पुण्य देनेवाले श्री अमरनाथ के दर्शन है।
गुफा में अमरकुंड का जल प्रसाद के रुप में ग्रहण किया जाता है। गुफा में टपकता बूंद-बूंद जल भक्तों
के लिए शिव का आशीर्वाद होता है और गुफा में दिखाई देने वाला अमर कबूतरों का जोड़ा तीर्थयात्रियों को आलौकिक आनन्द और अथाह खुशी देता है। |

Amarnath
caves ( अमरनाथ गुफा) भगवान शंकर का हिम स्वरुप यानि बर्फ का शिवलिंग |
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बाबा अमरनाथ की यह पवित्र गुफा भारत के जम्मू-कश्मीर
राज्य के श्रीनगर से उत्तर-पूर्व दिशा में लगभग १४५०० यानि लगभग ३८८८ मीटर ऊंचाई पर स्थित है। यह गुफा लगभग १५०
फीट क्षेत्र में फैली है और इसकी ऊंचाई करीब ११ मीटर है। इस गुफा की सबसे बड़ी विशेषता है यहां पर बर्फ के
शिवलिंग का बनना। यह स्वयंभु शिवलिंग माना जाता है। इस शिवलिंग का निर्माण गुफा की छत से
पानी की बूंदों के टपकने से होता है। यह बूंदे इतनी ठंडी होती है कि नीचे गिरते ही बर्फ का रुप लेकर ठोस हो
जाती है। यही बर्फ एक विशाल लगभग १२ से १८ फीट तक ऊंचे शिवलिंग का रुप ले लेता है, जो अनेक श्रद्धालूओं की
श्रद्धा का केन्द्र है।
अमरनाथ यात्रा

अमरनाथ यात्रा में शिव भक्तों को कड़ी कठिनाईयों का सामना करना
पड़ता है। रास्ते उबड़-खाबड़ है, रास्ते में कभी बर्फ गिरने लग
जाती है, कभी बारिश होने लगती है तो कभी बर्फीली हवाएं चलने लगती है। फिर भी भक्तों की आस्था और भक्ति
इतनी मजबूत होती है कि यह सारे कष्ट महसूस नहीं होते और बाबा अमरनाथ के दर्शनों के लिए एक अदृश्य शक्ति से खिंचे चले आते हैं।
अमरनाथ-यात्रा पर जाने के लिए दो मार्ग हैं- एक पहलगांव से और दूसरा सोनमार्ग बालटाल से।
पहलगांव - पहलगांव श्रीनगर से ९६ किलोमीटर दूर है। यह पर्वतों से घिरा
क्षेत्र है और सुंदर प्राकृतिक दृश्यों के लिए विश्वप्रसिद्ध है। यह लिद्दर नदी के किनारे बसा है।
चंदनबाड़ी - पहलगांव के बाद अगला पड़ाव चंदनबाड़ी है। यह पहलगांव से १६ किलोमीटर
दूर है। लिद्दर नदी के किनारे से इस पड़ाव की यात्रा आसान होती है। यह रास्ता वाहनों
द्वारा भी पूरा किया जा सकता है। पिस्सू टाप - चंदनबाड़ी से थोड़ा आगे बढ़ते ही पिस्सूटाप आता है। इसका
पौराणिक महत्व अमरनाथ दर्शन से जुड़ा है। शेषनाग - चंदनबाड़ी से पिस्सू टॉप होते हुए यात्रा का अगला चरण शेषनाग
होता है। यहां पर नीले पानी की झील है, जिसके लिए मान्यता है कि इसमें शेषनाग रहते हैं। यह चंदनबाड़ी से १२ किलोमीटर दूर स्थित हैं।
महागुनास पर्वत - शेषनाग से लगभग ४ से 5 किलोमीटर आगे बढऩे पर महागुनास पर्वत आता है। यह १४००० फीट ऊंचाई पर है।
इस स्थान पर अनेक झरनें, जल प्रपात और चश्में और मनोरम प्राकृतिक दृश्य दिखाई देते हैं।
पंचतरणी - महागुनास पर्वत से अगला पड़ाव पंचतरणी है। जो महागुनास पर्वत से ६ किलोमीटर दूर बसा है। यह महागुनास से
नीचे की ओर 12,500 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। यह भैरव पर्वत की तलहटी में बसा है। पंचतरणी अमरनाथ गुफा यात्रा का अंतिम पड़ाव है।
अमरनाथ गुफा की दूरी पंचतरणी से 6 किलोमीटर है। गुफा 13,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।
गुफा लगभग 100 फीट लम्बी और 150 फीट चौड़ी है। इसमें हिम शिवलिंग बनता है। |
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तीर्थ यात्रा की शुरुआत बाबा अमरनाथ के पवित्र तीर्थ यात्रा की
शुरुआत १ जुलाई से है। इसका समापन श्रावण पूर्णिमा यानि रक्षाबंधन के दिन २४ अगस्त को होगा। इस यात्रा
के साथ मात्र हिन्दुओं की ही नहीं बल्कि मुस्लिम और अन्य धर्म की श्रद्धालुओं की भी आस्था जुड़ी है। माना
जाता है कि इस पवित्र गुफा की खोज ही एक मुसलमान गडरिये के माध्यम से हुई।
श्री बाबा अमरनाथ के दर्शन करने वालों का आंकडा आठ दिन में ही एक लाख के करीब पहुंच गया ।
मोबाइल सेवा का अधिकारिक तौर पर शुभारंभ
केंद्रीय संचार एवं सूचना तकनीक राज्य मंत्री सचिन पायलट ने बृहस्पतिवार को पवित्र
अमरनाथ गुफा पर भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) की मोबाइल सेवा का अधिकारिक
तौर पर शुभारंभ किया। बीएसएनएल ने 13,500 फुट ऊंचाई पर स्थित पवित्र गुफा पर
मोबाइल सेवा शुरू करने के लिए बालटाल, नुनवान, लाकीपोरा, बेताब घाटी, संगम/पवित्र
गुफा, पंजतरणी, चंदनवाडी व चंदनवाडी बेस कैंप में कुल 11 टावर लगाए हैं। सचिन
पायलट ने बीएसएनएल के इस सफल प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि
इससे वार्षिक अमरनाथ यात्रा पर आने वाले 4 लाख से अधिक श्रद्धालुओं को लाभ होगा
और वे यात्रा के दौरान अपने घर पर परिवार के साथ लगातार संपर्क में रह सकेंगे। |
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