gits4u.com  

Home>  Hindi Section> Ajmer (अजमेर)

     

 

 
       Share

  भौगोलिक स्थितिः 
 अजमेर जिले के पूर्व में जयपुर, पश्चिम में पाली, उत्तर में नागौर तथा दक्षिण में भीलवाड़ा और राजसमंद स्थित है | यह जिला राज्य के मध्य 25º.38’ से 26º.58’ उत्तरी अक्षांश से 75º.22’ पूर्वी देशान्तर के मध्य स्थित है | यह समुद्रतल से करीब 870 मीटर उंचा है | 
   जलवायुः यहां गर्मी में अधिक गर्मी और सर्दी में ठंड पड़ती है | इस जिले में वर्षा तुलनात्मक रुप से कम होती है | वर्षा औसत 60.18 से.मी. है | 
   क्षेत्रफलः 8,481 वर्ग किलोमीटर [नगरीय- 334.02 वर्ग कि.मी., ग्रामीण- 8,146.98 वर्ग वर्ग किलोमीटर] | वन क्षेत्रफल- 611.71 वर्ग किलोमीटर, आरक्षित वन क्षेत्र- 194.28 वर्ग किलोमीटर., रक्षित वन क्षेत्र- 417.32 वर्ग किलोमीटर अवर्गीकृत वन क्षेत्र- 0.11 वर्ग किमी. | अभयारण्य- रावली
टाड़गढ़, प्रमुख नदियां- साबरमती, खारी डाई बनास, बांध/झीलें- पुष्कर, आना सागर, फाई सागर, नारायण सागर बांध, शिव सागर |
जनसंख्या
   सकल-   21,81,670, ग्रामीण- 13,06,994, शहरी-  8,74,676,   स्त्री- 10,51,750, पुरुष- 11,29,920,  जनसंख्या वृद्धि दर- 26.17,  लिगांनुपात- 931   महिलाः 1000 पुरुष, अनुसूचित जाति- 3,86,298,   अ. जनजाति- 52,634,   सघनता- 257 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर, परीवारों की संख्या- 3,76,877, साक्षरता दर- 64.65 प्रतिशत [पुरुष 79.37, स्त्री 48.86 प्रतिशत] | 
   उप तहसीलें- 1, गिरदावरी सर्किल- 54,  पटवार र्किल- 528, कुल गांव- 1,038, आबाद गांव- 1,025 गैर आबाद गांव- 13, ग्राम पंचायत- 276, विद्युतीकृत ग्राम- 1,001, पुलिस थाने- 32, चौकियां- 43, कारागृह- 3 |
कृषि/पशुधन
  
कृषि क्षेत्र [हेक्टेयर में]- 8,42,345, अकृषि क्षेत्र-  3,43,521, कृषि योग्य बरानी भूमि- 4,98,824,  कुल पशुधन- 16,11,401, पशु चिकित्सालयों की संख्या- 48 | 

    Pushkar lake  
    Pushkar Lake

   Lord Brahma temple in Ajmer
   Lord Brhma Temple

    Camel race in Pushkar fair  in Ajmer            
    Pushkar Camel fair        

  

   परिवहन/संचार
   जिला सड़कें- 2,426  किमी. | राज्य राजमार्ग संख्या-7-104  किमी., 12-41 किमी., 18-7 किमी.,  26-56 किमी., 46-59 किमी., 39-58 किमी.| राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या- 8-133  किमी., 14-7 किमी., 79-64 किमी., 79 ए-38 किमी., 89-38 किमी.| पोस्ट आफिंस- 430, टेलीग्राफ आफिस - 40 | 
   सहकारिता/उद्योग
   सहकारी समितियां- 1,165,  सदस्यों की संख्या- 3,94,712, दुग्ध सहकारी समितियां- 532, सदस्यों की संख्या- 41,156,  दुग्ध संग्रहण-  165 टन प्रतिदिन | फैक्ट्रियों की संख्या-  444, पंजीकृत लघु उद्योग- 13,903, औद्योगिक क्षेत्रों की संख्या - 7 | 
स्वास्थ्य/शिक्षा
   एलोपैथिक अस्पताल- 13, आयुर्वेद औषधालय एवं यूनानी अस्पताल- 140,  सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र- 10, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र- 50, स्वास्थ्य उपकेन्द्र- 279, महाविद्यालय- 38,; प्राथमिक विद्यालय- 1,467, उच्च प्राथमिक विद्यालय- 584, उच्च माध्यमिक विद्यालय- 88 | 
   ऐतिहासिक परिदृश्य
   सातवीं शताब्दी में राजा अजयराज ने इस नगर की स्थापना की | बारहवीं में चौहान राजाओं ने अजमेर को भारत की राजधानी बनाया | शाहजहां के सबसे बड़े पुत्र दाराशिकोह का जन्म अजमेर में ही हुआ था | स्वतंत्रता के बाद अक्टूबर, 1956 तक अजमेर 'सी' श्रेणी के राज्यों में से एक था | नवम्बर, 1956 में अजमेर-मेरवाड़ा का राजस्थान में विलय हो गया |
   पर्यटक स्थल
   ख्वाजा साहब की दरगाहः ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह अजमेर के आकर्षण का प्रमुख केन्द्र है | इसके निर्माण की शुरुआत इल्तुतमिश ने करवाई | निर्माण कार्य को& पूरा हुमायुं ने किया | अकबर ने मस्जिद, बुलन्द दरवाजा एवं महफिलखाने का निर्माण कराया | शाहजंहा ने रोजे के ऊपर सफेद संगमरमर की गुम्बद एवं जामा मस्जिद बनवाई|
ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह ख्वाजा साहब और गरीब नवाज के नाम से विख्यात है | यहां मुस्लिमों के साथ अन्य धर्मों के लोग आते है | यहां प्रति वर्ष पवित्र रमजान माह कि एक से छह तारीख तक उर्स चलता है | इस अवसर पर देश-विदेश से लोग यहां आते है | उर्स चांद दिखाई देने पर दरगाह के बुलंद दरवाजे पर झंडा फहराने के साथ शुरु होता है | शाही महफिलखाने में रात 11 बजे से सवेरे 3 बजे तक आध्यात्मिक कव्वालियां होती है | यह कार्यक्रम 6 दिन तक चलता है | एक रज्जब से 6 रज्जब तक रात्री को ख्वाजा साहब की मजार में गुसल की रस्म होती है | प्रथम चरण में खादिम केवड़े और गुलाब जल से मजार को धोते है, फिर दरगाह दीवान व अन्य सूफी संतो को बुलाया जाता है, जो मजार शरीफ को गुसल देते हैं | मजार शरीफ से उतरा गुलाब जल खादिम बोतलों में भरकर जायरीनों को प्रसाद के तौर पर देते हैं | रज्जाब की 6 तारीख को ख्वाजा साहब की वफात का दिन मनाया जाता है | इस दिन सुबह से ही जायरीन नमाज के बाद दरगाह में आना शुरु कर देते है,  उन पर गुलाब जल के छीटें दिए जाते हैं | इसे कुल के छीटें या कुल की रस्म भी कहा जाता है | तीन दिन बाद रज्जब की 9 तारीख को आखरी गुसल की रस्म होती है | इसे बड़े कुल की रस्म भी कहा जाता हैं |  
   ब्रह्माजी तथा रमा बैकुण्ठ मंदिर- पुष्कर झील के पूर्व की ओर जहां दक्षिण स्थापत्य शैली पर आधारित रामानुज सम्प्रदाय का विशाल रमा बैकुण्ठ मंदिर है, वहीं पश्चिम की ओर काफी ऊंचाई पर ब्रह्माजी का प्राचीन मंदिर है | विश्व में ब्रह्माजी के एकमात्र मंदिर का जीर्णोद्धार प्रथम बार आदि जगतगुरु शंकाराचार्य ने कराया था | वर्तमान मंदिर की सीढियां और फर्श संगमरमर से निर्मित हैं | इस मंदिर में ही पातालेश्वर महादेव, पंचमुखी महादेव, नर्वदेश्वर महादेव, नारद, लक्ष्मीनारायण, गौरीशंकर, सूर्यनारायण, नवग्रह, दत्तात्रेय तथा सप्तऋषि मंदिर भी अलग से बने हुए हैं |
   सावित्री का मंदिर- ब्रह्माजी के मंदिर से दक्षिण-पश्चिम की ओर रत्नगिरि पर्वत पर ब्रह्माजी की पत्नी सावित्री का मंदिर स्थित है | इस मंदिर में जहां सावित्री के दो चरण चिह्न प्रतिष्ठित हैं, वहीं उनकी पुत्री सरस्वती की प्रतिमा भी है |    वराहजी का मंदिर- विष्णु के वराह अवतार का यह मंदिर चौहान राजा अरणोराज (1123-1150) ने बनवाया | इसका जीर्णोद्धार महाराणा प्रताप के भाई शक्तिसिंह ने करवाया था |  अजमेर के आनासागर की पाल बंधवाने और पुष्कर झील की मरम्मत का कार्य भी इन्हीं ने करवाया | जयपुर नरेश राजा जयसिंह द्वितीय ने इसका पुनर्निर्माण कराया | कहा जाता है कि वराह का प्राचीन मंदिर 150 फीट ऊंचा था और स्थापत्य की सर्वोत्तम कला कृतियों में से एक था | इसकी अब केवल 20 फीट ऊंचाई तक की दीवारें ही शेष रह गई हैं | यहां आत्मेश्वर महादेव (जिन्हें अमठेश्वर भी कहा जाता है) का प्राचीन मंदिर भी है, जिसके बारे में कहा जाता है कि वह भूगर्भ में हैं | उसी पर वर्तमान मंदिर अजमेर के मराठा शासक गुमानजी राव ने 1816 ई. में बनवाया |   
   पुष्कर झील- बावन घाटों के बीच लगभग तीन मील के घेरे में पुष्कर की पावन झील स्थित है | इसका जल पूरी तरह कभी नहीं सूखता | मध्य भाग में तो जल सदैव ही काफी गहराई तक बना रहता है | झील के चारों ओर विभिन्न घाटों में इन्द्र घाट, महादेव घाट, बंशी घाट, मुरली घाट, नृसिंह घाट, विश्राम घाट, बद्री घाट, गणगौरी घाट, राम घाट, चीर घाट, जनक घाट, गौ घाट, यज्ञ घाट, ब्रह्म घाट, परशुराम घाट तथा सप्तऋषि घाट प्रमुख है | इनमें से कुछेक घाट के फर्श और उनकी पेड़ियां संगमरमर से निर्मित हैं | श्रद्धालु तीर्थराज की परिक्रमा करते हैं | घाटों पर तीर्थराज की आरती उतारी जाती है | कार्तिक मास में कड़ी सर्दी के बावजूद स्त्री-पुरुष सूर्योदय से पूर्व पुष्कर की पावन झील मे स्नान कर पुण्य कमाते हैं | 
   अढ़ाई दिन का झोपड़ा- अढ़ाई दिन का झोपड़ा प्रथम चौहान सम्राट बीसलदेव ने सन् 1153 ई. में संस्कृत पाठशाला के लिए बनवाया था | बाद में शाहबुद्दीन गौरी ने इस पाठशाला को मस्जिद में परिवर्तित करने के आदेश दिए | इस परिवर्तन का कार्य सुल्तान शमसुद्दीन इल्तुतमिश के समय में हुआ | परिवर्तन के समय सात मेहराब बनाए गए | तीन केन्द्रीय मेहराबों पर तीन पंक्ति में लिखावट है | यह लिखावट पत्थरों पर खुदी अरबी, नागरी या सूफी लिपि में हैं | एक मुसलमान फकीर पंजाबशाह का उर्स यहां लगाने के बाद से यह स्थान अढ़ाई दिन का झोंपड़ा कहलाने लगा |  
   सोनीजी की नसियां- सेठ मूलचंद सोनी ने इसका निर्माण प्रारम्भ किया | उनके पुत्र सेठ टीकमचंद सोनी ने सन् 1865 में इसे पूरा कराया | यह मंदिर प्रथम जैन तीर्थंकर आदिनाथ अथवा ऋषभदेव का है | मुख्य मंदिर के पीछे विशाल भवन में जैन दर्शन एवं तीर्थंकरों के जीवन से संबंधित विविध घटनाएं चित्रों तथा सुनहरे मांडनों के माध्यम से प्रदर्शित है | 
   * गांधी जी की अस्थियां पुष्कर झील में प्रवाहित की गई थी, उस स्थान को वर्तमान में गांधी घाट के नाम से जाना जाता है | किशनगढ़ राजपूत चित्रकला की एक ख्यातनाम शैली से सम्बन्ध रखता है, जो 'बणी-ठणी' शैली के नाम से सम्पूर्ण विश्व में विख्यात है |  
फसलें
   दो प्रधान फसलें खरीफ और रबी है | खरीफ फसलें- बाजरा, ज्वार, दालें, मक्का और मूंगफली हैं | यह जून-जुलाई माह में बोयी और सितम्बर-अक्टूबर में काटी जाती हैं | 
रबी फसलें- गेहूं, जौ, दालें, तिर्लहन हैं | इसकी बुवाई अक्टूबर-नवम्बर और कटाई मार्च-अप्रेल में होती है |
   खनिज संपदा
   ऐस्बेस्टास कंवलाई [अजमेर तहसील] और नई खुर्द [ब्यावर तहसील], कोटरा [ब्यावर तहसील], अर्जुनपुरा [अजमेर तहसील] और कोटड़ी [सरवाड़ तहसील] मे मिलता है | बेरिल लोहागढ़ और मकरेडा के निकट पेटामेटाइट के रुप में पाया जाता है | पन्ना, राजगढ़ में केडिया [केकड़ी तहसील], बाबरगढ़, तारागढ़ की पहाड़ियों [ब्यावर तहसील], राजगढ़ के निकट जीवन खानों  और अजमेर के निकट मकरेडा तथा लोहागढ़ में पाया जाता है | तामड़ा सरवाड़ के निकट अभ्रक भी पाया जाता सीसा, जस्ता, तांबा तथा लोहे की खानें तारागढ़ व सरवाड़ [केकड़ी तहसील] में है  
 

          

[Information Technology ] [ Environment ] [ Agriculture ] [Renewable Energy ] [Clean Water ] [Education ] [Child Care ] [Health Care ] [ Wild Life ] [ Railways ] [ Airways ] [ Weather] [ Contact Us ] [ Advertise ] [ About Us ] [ Disclaimer ]  

Site copyright ã 2006,  gits4u.com  All Rights Reserved.